मौसम का तक़ाज़ा

अंडे की ज़र्दी

सर्दी ही सर्दी

खुश्क और कड़क

घी गुड़ और नमक

बाजरे की रोटी

और मिर्च का अचार

पालक का साग

चलो बैठें आग के पास

शोलों की गर्मी और धुआँ

कुछ बहके होश

और बहे नाक

अँखिया भी रिसे

मिचमिचाएँ

सेक लूँ हाथ

सर्दी में कम्बल

ओढ़ लूँ आज

गर्मी का पसीना

भुला दूँ

पोंछ लूँ शिकन

अब जाने भी दूँ यार

Published by