Baaton he baaton mein (Hindi)

जब कभी दिन कि शुरुआत में हो 

दिल में जैसे संगीत या साज़

साथ साथ हो चाय पे दो बात 

और बात हो जब हृदय के भावों से मिलती 

कुछ हिलती कभी ढलती

डूबती उभरती

अठखेलियाँ लेती 

ठहाके भरती चैन की दो सांसें

वो बात क्या बात ! 

अंतर के अंदर के समंदर पर

जैसे नए दिन की नई सी वो केसरिया चमक

लहरों पर झूलती

सावन की सुगंध

साजन की यादों सी 

मन में मोम जैसी पिघलती

ऐसे जब हो दिन का आरंभ

बिना झटके, बिना आडम्ब

तो बात क्या बात ! 

 हल्के हल्के जब हिचकोले खाए एक मीठी सी मुस्कान

शायद अंतर्मन की प्रसन्नता व शांति का निधान

पंख फैलायें

भरें उड़ान 

डूबें हो जब सभी इन्ही रंगो में 

साथी, दोस्त व मेहमान, घर और दुकान

ऐसी बात क्या बात ! 

ऐसी नर्मी, दिल में गर्मी 

शीतों से था जिसका इंतज़ार 

पथरीले ख़्वाबों में रहते गुज़रते 

अब पहुँची है बहुत अरसे बाद 

आज बनी है बात ! 

Comments

One response to “Baaton he baaton mein (Hindi)”

  1. bharti Avatar
    bharti

    lovely… v nice play of words, yet again..! kya baat!!

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